सिंह तिवारी की उपाधि दी है। भर वंश के राजा २४९ ई॰ में कृष्णराज का शासन था। चौथी सदी में यहाँ नाग शासको का राज्य स्थापित हुआ, जिन्होंने नीलकंठ महादेव का मन्दिर बनवाया।
कालिंजर दुर्ग, भरो के नाम
👇👇👇👇👇👇
भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित एक दुर्ग है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विंध्य पर्वत पर स्थित यह दुर्ग विश्व धरोहर स्थल खजुराहो से ९७.७ (97.7) कि॰मी॰ दूर है। इसे भारत के सबसे विशाल और अपराजेय दुर्गों में गिना जाता रहा है। इस दुर्ग में कई प्राचीन मन्दिर हैं। इनमें कई मन्दिर तीसरी से पाँचवीं सदी गुप्तकाल के हैं। यहाँ के शिव मन्दिर के बारे में मान्यता है कि सागर-मन्थन से निकले कालकूट विष को पीने के बाद भगवान शिव ने यहीं तपस्या कर उसकी ज्वाला शान्त की थी। कुछ कलाकृतियां राजा वीरसेन भारशिव की भी पाई जाती हैं
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला कार्तिक मेला यहाँ का प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है। इस किले पर भर शासक थे,कहा जाता है कि इस किले को कोई भर शासको से जीत नहीं पाता था,
जब व्याघ्रदेव उनके यहां तीर्थयात्रा पर आये थे। तब भर (राजभर) राजा ने अनुरोध किया की उनकी एक रियासत गहोरा पर लोधी ने कब्जा कर लिया है। इसे मुक्त करा दे उन्होंने उस रियासत को मुक्त करने हेतु अपने दोनों पोतो को भर राजा के साथ मिलकर लड़ने को कहा पर लोधी राजा ने हरा दिया, तब व्याघ्रदेव ने कूटनीति चाल चली लोधी राजा के दिवान को मिलाया दिवान तिवारी ने लोधी राजा को जहर देकर मार दिया।आज भी अधरजिया तिवारी एवं सिंह तिवारी की उपाधि दी है। भर वंश के राजा २४९ ई॰ में कृष्णराज का शासन था। चौथी सदी में यहाँ नाग शासको का राज्य स्थापित हुआ, जिन्होंने नीलकंठ महादेव का मन्दिर बनवाया।
Comments
Post a Comment